गली क्रिकेट ( रुल्स व रेगुलेशन )
गली क्रिकेट
आईपीएल भारत का एक त्योहार बन चुका है। आईपीएल आते ही इसका नशा सभी के सिर चड़ पर जाता है।जवान व्यक्ति ही नहीं बल्कि बच्चे भी इस नशे में धुत हो जाते है। पिछले कुछ सालों से क्रिकेट ने खूब नाम कमाया है। हर मोहल्ले का लड़का अब सचिन तेंदुलकर बनना चाहता है और इसकी शुरुआत हमेशा गली के क्रिकेट से होती है।
सच कहें तो गली का यह क्रिकेट किसी वर्ल्ड कप या आईपीएल से कम नहीं है। जितने नियम आईपीएल और वर्ल्ड कप में नहीं होते है उससे कही ज्यादा नियम गली क्रिकेट में मिल जाते है। इन नियमो का सख्ती से पालन भी होता है। अगर कोई नियम के साथ ना चले तो उसे दूसरे दिन खेलने को नहीं मिलता है, मगर हां जिसका बैट रहेगा उसके साथ यह सख्ती नहीं की जाएगी क्योंकि बैट एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्रिकेट का।
कल इतवार था। मोहल्ले के बच्चे स्कूल में आज की हाजिरी लगाकर आ गए थे। सांझ का वक्त था। शाम की ठंडी हवा गलियों से गुजर रही थी। रोनक अपने घर से निकला। कुछ देर के बाद सभी मैदान में आ गए यानी गली में आ गए। बच्चों के लिए यह गली ही मैदान है। आसपास गुजरने वाले मैच के दर्शक है। कभी कभी ये दर्शक गली क्रिकेट में बाधा भी डाल देते है। इन दर्शकों की वजह से न जाने खिलाड़ियों को कितनी बार रुकना पड़ता होगा।
मोहल्ले की गली थोड़ी चौड़ी थी लिहाज़ा एक साथ पांच या छह से ज्यादा खिलाड़ी फिल्डिंग कर सकते है । सभी बच्चे गली के बीच खड़े हो गए। फर्स्ट और सेकंड कौन रहेगा यह हमेशा से पता रहता है क्योंकि जिसका बैट वह लड़का फर्स्ट और जिसकी बोल वह लड़का सेकंड। फर्स्ट और सेकंड पर विचार विमर्श कभी नहीं होता है। बाकी का बैटिंग ऑर्डर कैसा रहेगा यह फिक्स करने के लिए ढेरों तरीके है। रोनक ने चिंटू के पीछे पीठ पर, उंगलियों के सहारे बैटिंग ऑर्डर डिसाइड कर लिया। स्टंप की जगह बाल्टी रखी हुई थी। अंपायर इन सभी बच्चों से दो तीन साल बड़ा था और दो क्लास आगे भी।
गली क्रिकेट शुरू होने से पहले सभी को रूल्स बता दिए गए थे। रूल्स बताने में ही आधा घंटा निकल गया। रूल्स कुछ इस प्रकार के थे- जैसे हर खिलाड़ी के लिए पहली बाल ट्राई होगी, अगर अंपायर की बात नहीं मानी तो खेल देखने वालो का फैसला फाइनल होगा, बाल अगर बगल की दीवार को डायरेक्ट लगी तो खिलाड़ी आउट होगा, जिसका बैट होगा ओपनिंग वहीं करेगा, किसी आंटी या अंकल के घर में बाल गई तो आउट, नाली से बाहर वहीं निकलेगा जिसने मारी है, जो बीच में गेम छोड़ेगा उसे अगले दिन नहीं खिलाएंगे, जब अंधेरा हो जाएगा तब बॉलिंग स्लो कराई जाएगी, अगर तीन बाल लगातार वाइड की तो ओवर कैंसल हो जाएगा, जो अच्छा स्कोर मारेगा अगले दिन वही पहले बैटिंग करेगा। इस प्रकार के रूल्स गली क्रिकेट में होते है।
आरीफ ने पहली बॉल ट्राई डाली। रोनक बैटिंग कर रहा था। आरीफ ने दूसरी बॉल डाली। दूसरी बॉल बाल्टी को हल्की सी छूकर गई। आरीफ ने "आउट है" बोल दिया था। मगर रोनक नहीं माना। उसने अंपायर की ओर रुख किया। अंपायर ने एक उंगली ऊपर उठा दी। रोनक फटाफट अंपायर के करीब आया और डिस्कशन होने लगा। इस डिस्कशन मे थोड़ी गालियां भी शामिल थी। फाइनली जब नतीजा नहीं निकला तो सभी को एक ही रास्ता नजर आया और यह रास्ता राम बाण की तरह काम करता है। रोनक बोला-
"खा तेरी मां की कसम कि मैं आउट हूं।"
अंपायर अपने डिसीजन पर अडा रहा। उसने रोनक को आउट करार दिया। मां की कसम कोई झूटी नहीं खाता यह बात रोनक को अच्छे से पता है। रोनक ने बैट दूसरे के हाथ में थमा दिया और फिल्डिंग करने लगा। गली क्रिकेट जारी था, सभी रुल्स के साथ।
रविंद्र मुंडेतिया .......
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