युवाओं को अपना लक्ष्य निश्चित करना होगा।
युवाओं को अपना लक्ष्य निश्चित करना होगा।
इससे पहले की आज का दिन भी अस्त हो जाए आप अपना लक्ष्य निश्चित कर ले क्योंकि हमारे जीवन में एक लक्ष्य का होना बेहद ज़रूरी हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि उठो! जागो और तब तक नहीं रुकना जब तक कि लक्ष्य हासिल न हो। आज दुनिया में जितने भी लोकप्रिय लोग हैं उन सभी ने अपने जीवन में एक लक्ष्य सोचा और प्रतिदिन उसपर कार्क या। उदाहरण के लिए - डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम।
मैंने अभी तक जितनी प्रेरणादायक किताबें पढ़ी हैं उन सभी में एक चैप्टर समान हैं और वो हैं लक्ष्य के बारे में। उन किताबों के लेखकों ने अनगिनत उदाहरण देकर बड़े अच्छे से बताया और समझाया हैं कि हमारे जीवन में एक निश्चित लक्ष्य का होना कितना महत्वपूर्ण हैं। हमारा लक्ष्य अर्जुन की तरह सटीक होना चाहिए। सिर्फ़ और सिर्फ़ चिड़िया की आँख न कि पेड़, पत्ते, टहनियां, चिड़ियां आदि दिखे। ट्रेन स्टेशन पर देरी से पहुँचती है मगर पहुँच ज़रूर जाती हैं क्यों ? क्योंकि उसे अपना लक्ष्य पता हैं। यही कमाल होता हैं हमारे जीवन में एक निश्चित लक्ष्य का। भले ही देरी से पहुँचे परंतु पहुँच ज़रूर जाते हैं। बिना लक्ष्य के पथ पर चलना बिल्कुल फायदेमंद नही हैं क्योंकि जब पता ही नही जाना कहाँ हैं तब तो चलकर भी क्या फ़ायदा ? आप कहीं पे भी नहीं पहुँच पाओगे और यही हाल आज देश की अधिकांश युवा पीढ़ी का भी हैं। अधिकांश युवा पीढ़ी के पास आज एक ऐसा निश्चित लक्ष्य नहीं हैं जिसे वे फॉलो करें और आगे बढ़ते रहें।
युवा देश का भविष्य होता हैं। देश का भविष्य युवा पीढ़ी की सोच और उनके प्रदर्शन पर निर्भर करती है। जिस देश का युवा जागृत और सक्रिय रहता हैं उस देश की बढ़ोतरी निरंतर बनी रहती है। युवा अपनी काबिलियत से पुरी दुनिया बदल सकते हैं। आंकड़े के मुताबिक भारत में 25 करोड़ से ज्यादा युवा आबादी हैं। भारत को सबसे युवा देश कहा जाता है। हमारे देश में कुछ युवा ऐसे भी हैं जो अपने देश का नाम रोशन कर रहें है। उन युवाओं ने अपना लक्ष्य सटीक रखा और इसका परिणाम ये हुआ कि आज उन्हें देश और दुनिया जानती हैं। वे युवा किसी परिचय के मोहताज नहीं। वही दुसरी ओर आज हम लाखों युवाओं को देखते है जो अपनी ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहें हैं। उनकी उम्र शिक्षा प्राप्त करने की होती हैं, अपना करियर बनाने की होती हैं, नए कार्य सीखने की होती है मगर वे दुसरे ही गलत कामों या किसी नशे के शिकार होकर अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर रहें हैं। नशे में फसा हुआ युवा न सिर्फ़ अपना जीवन और करियर बर्बाद कर रहा हैं बल्कि माता पिता के सपनों पर भी पानी फेर रहा हैं। नशे ने कभी किसी का भला नहीं किया हैं।
युवा लक्ष्य निश्चित क्यों नहीं कर पाते हैं ?
1) लक्ष्य के बारे में सोचते नहीं।
कोई भी निर्णय लेने से पहले उसके बारे में सोचना बेहद ज़रूरी हैं। आज का युवा सोचना कम कर चुका हैं। उनकी कल्पनाशक्ति कम हो चुकी हैं। जब तक युवा लक्ष्य और उसके परिणाम के बारे में सही रूप से सोचेगा नहीं तब तक एक निश्चित लक्ष्य नहीं बना पाएगा।
2) कंफर्ट जोन में खुश हैं।
युवा अपने कंफर्ट जोन में खुश हैं। इस जोन में उनके दोस्त और इर्द-गिर्द रहने वाले लोग शामिल होते हैं। इस कंफर्ट जोन में रहने के निदान युवा 'आउट ऑफ़ द बॉक्स' सोच ही नहीं पता हैं। सौबत हमारी ज़िंदगी में काफ़ी अहम भूमिका निभाती है। आने वाले कुछ सालों में आप किस पद पर होंगे ये आपकी सौबत बता देती है। कहते हैं - जैसी संगत वैसी रंगत। निश्चित लक्ष्य निर्धारित करने हेतु और उसे हासिल करने हेतु युवाओं को अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलना पड़ेगा और साथ ही साथ अच्छी सौबत वाले लोगों के साथ उठना बैठना होगा। ये मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं है।
3) मार्गदर्शक सही नहीं हैं।
एक युवा किससे राय व सलाह ले रहा हैं ये भी बहुत मायने रखता हैं। आज के युवाओं में सबसे बड़ी कमी ये भी हैं कि वे अपने आप को सबसे बेहतर समझते हैं। ऐसे युवा किसी की राय भी नहीं लेते हैं। अच्छी राय और अच्छे सुझाव आपकी जिंदगी बदल सकते है। आप किसी ऐसे शिक्षक या व्यक्ति से सलाह लें जो आपकी फील्ड के बारे में आपको सही राय दे सकें न कि ऐसे व्यक्ति से जो आपको भ्रमित कर दे। अच्छे और सफल व्यक्ति से ज़रूर सलाह लें।
4) सोशल मीडिया का जकड़न।
यह अपने आप में एक विशाल टॉपिक हैं। मीडिया आज अपने इशारों पर लांखो युवाओं को नचा रहा हैं। मीडिया पर फेक रिलेशनशिप के चलते युवा अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। रिल्स का यह ज़माना युवाओं के सोचने की क्षमता को कम कर रहा हैं। युवाओं की कल्पनाशक्ति सोशल मीडिया के कारण बहुत कम हो चुकी है। उंगलियां अब थकती नहीं है स्क्रोल करते-करते। इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक अलग ही किस्म की होड़ चल रहीं हैं। दिखावे की होड़। लाइक, कॉमेंट्स बटोरने की होड़। यह शारीरिक और मानसिक रुप से युवाओं को जकड़ चुका हैं। यही मीडिया करियर का भी साधन हैं मगर इसी मीडिया के कंटेंट से अधिकांश युवा अपना मानसिक संतुलन भी खो रहे हैं। लाखों युवाओं को अश्लील कंटेंट देखने की आदत हो चुकी है। इसमें से कुछ युवा अश्लील कंटेंट के निर्माता भी है। इसी मीडिया के जरिए युवा वर्ग आए दिन नए-नए अपराध कर रहा हैं। अगर युवाओं को अपना लक्ष्य प्राप्त करना हैं तो आज से ही उन्हें सही तरीके से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना होगा। याद रहे जब तक व्यक्ति सोशल मीडिया को चला रहा है तब तक ठीक है लेकिन जब सोशल मीडिया व्यक्ति को चलाने लगे तब उसके दुष्परिणाम हो सकते हैं।
लक्ष्य निर्धारित कैसे करें ?
अपनी क्षमता को पहचानें। बिना अपनी क्षमता को जानें आप अपना लक्ष्य निर्धारित नहीं कर पाएंगे। आपकी रुचि किन कार्यों में हैं ? यह सोचिए। क्या आप जो गोल सेट कर रहें हो उससे आपको फ़ायदा है कि नहीं ? ज़रूरी नहीं बड़ा लक्ष्य रखें। छोटे-छोटे लक्ष्य को हासिल कर आप बड़े लक्ष्य तक पहुंच सकते हो। बूंद बूंद से ही सागर भरता हैं। अगर आप असमंजस की स्थिति में, गोल सेट नहीं कर पा रहे हैं तो सफल लोगों से राय अवश्य ले।
लक्ष्य को कैसे प्राप्त करें ?
1) योजना बनाए।
लक्ष्य निर्धारित करने के पश्चात योजना बनाए क्योंकि बिना योजना ( Planning ) बनाए कार्य करना मतलब बार-बार असमंजस की स्थिति में पड़ना। योजना बनाने से आपको सही दिशा और पथ मिल जाता हैं जिसकी बदौलत आप अपने लक्ष्य की ओर आसानी से बढ़ सकते हैं।
2) टाइम मैनेजमेंट।
कहते हैं वक्त सबसे कीमती चीज़ हैं, अगर एक बार निकल गया तो फ़िर कभी नही आता है। मैं पुस्तकालय में अक्सर विद्यार्थियों को 'टाइम मैनेजमेंट' से संबंधित पुस्तके पढ़ते देखता हूं। आप अपनी दिनचर्या के बारे में सोचे। लक्ष्य से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दे। अनावश्यक कार्यों में वक्त की बर्बादी ना करें जैसे - घंटों किसी से गॉसिप करना, मोबाइल चलाना, सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना, टीवी शोज देखना वगैरह वगैरह। जो युवा टाइम मेनेजमेंट करना सीख जाता हैं उसके लिए लक्ष्य प्राप्त करना आसान हो जाता है।
3) गलतियां नहीं, सीख हैं।
इन्सान गलतियों का पुतला हैं। बिना गलतियां करें हम कुछ भी नया नहीं सीख सकते। लक्ष्य का पीछा करते समय हमसे अनेकों गलतियां होती हैं। उन गलतियों से हमें निराश, हताश और अपने आप को कोसना नही हैं। गलतियां जो सीख हमें देती हैं वो दुनिया का कोई भी शिक्षक और मार्गदर्शक नहीं सकता हैं। हमें दूसरों की गलतियों से भी सीखना चाहिए क्योंकि हमारी ज़िंदगी इतनी बड़ी नहीं हैं कि सारी गलतियां हम करें।
4) अच्छा पढ़ो।
आज का युवा पढ़ने का आदी नहीं रहा। बेहद कम युवा हैं जो किताबें पढ़ते हैं। पढ़ना कभी नुकसानदायक नहीं होता। ऐसी किताबें पढ़े जो आपको प्रेरणा दे। किसी ने कहा है कि ऐसी किताबें पढ़ो जिसे पढ़ने के बाद आप, आप न रहो। यानी किताब पढ़ने के बाद आपके विचार, आपकी सोचने की क्षमता बदल जाए। पढ़ने से आपकी कल्पनाशक्ति तेज़ होती हैं। आपके दिमाग में नए नए विचार उत्पन्न होने लगते हैं।
......रविंद्र मुंडेतिया
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