शाम सागर किनारे
यूँ तो मुंबई शहर अपने आप में एक बहुत ही खूबसूरत शहर है। यहाँ ऊंची ऊंची इमारतें है, खुले बाग है, मंदिर है, मस्जिद है, चर्च है, और एक मन लूभावी समुद्र तट है। मुंबई का पश्चिमी समुद्र तट लंबा और लोगों की चहल पहल से भरा रहता है। ख़ासकर शाम के वक्त। शाम के वक्त मुंबई के तटों पर लोगों की चहल पहल देखने को मिल जाती है। परिवार के लोग, दोस्तों की टोली, प्रेमी जोड़े और कुछ ऐसे लोग जो सिर्फ समुद्र को निहारने आते है या अपने मन को हल्का करने के लिए। मुंबई के सभी पश्चिमी तटों पर लगभग मैं कई बार जा चुका हूँ। बहुत बार घूमने पर शहर अक्सर छोटा लगने लगता है। फिर आप किसी भी जगह पर जाने के लिए ज्यादा सोचते नहीं हो। बस मन किया और चल दिए।
( वो आई और लहरों के ठीक सामने बैठ गई )
सागर का किनारा एक ऐसी जगह है, जिसको देखकर मैं मन की गहराइयों में डूब जाता हूँ। जिस प्रकार एक मछली पानी की गहराइयों में गोते लगाती है ठीक उसी प्रकार मैं भी समुद्र की लहरों और उसकी लहरों से उठने वाली आवाजें सुनकर मन की गहराइयों में गोते लगाने लगता हूँ। समुद्र का रंग, इसका विशाल स्वरूप, इसकी सुंदरता मुझे अपनी ओर खींचती है। कभी कभी इसके विशाल स्वरूप को देखता हूँ तो ख्याल आता है कि काश मेरे स्वभाव में भी ऐसी ही विशालता आ जाए तो कितना अच्छा होगा न।
( नई सवारी )
समुद्र बहुत विशाल है और साथ ही कितने रहस्य वो अपने अंदर छुपा के रखता है फिर भी शांत रहता है। हम मनुष्य कब इसकी तरह शांत रहना सीखेंगे। हम कितनी जल्दी अशांति को अपना लेते है। कितना अच्छा होता अगर हर मनुष्य समुद्र की भांति शांत रहना सिख जाता। लेकिन समुद्र हमे यह भी दिखाता है कि शांत लोगों का क्रोध कितना भयानक होता है। फिर तबाही ही आती है। समुद्र की लहरें जब तट से आकर टकराती है तब ऐसा लगता है मानो वो एक सबक सिखा रही हो कि ये जीवन संघर्ष से भरा हुआ है। तुमको यहां बस लड़ते रहना चाहिए। हार कभी नहीं माननी चाहिए।
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