इम्तिहान ( कितने पाप कितने पुण्य हिन्दी उपन्यास से )
18 इम्तिहान नजदीक आ रहे थे। पहला सेमेस्टर कब आया पता ही नही चला। इम्तिहान एक ऐसी चीज है, जो कोई भी विद्यार्थी देना नही चाहता है, परंतु देनी पड़ती है। अब कुछ ही दिन शेष रह गए थे। जब इम्तिहान की तारीक नजदीक आई तब कुछ होनहार विद्यार्थियो को लगा कि अब हमे किताबे खोलनी चाहिए। ढेरों विद्यार्थी जो कभी लेक्चर मे ध्यान तक नही देते थे वे अभी कॉलेज की लाइब्रेरी मे जाकर पढ़ने की भरपुर कोशिश करने लगे। कुछ तो पंद्रह मिनट पढ़कर थक गए थे क्योकि वे पूरे सेमेस्टर का एक साथ पढ़ने की कोशिश कर रहे थे। उन्होनें कभी गौर से अपनी किताब तक नही देखी थी। पाठ के नाम भी पहली बार पढ़ रहे थे। इम्तिहान का माहौल था लिहाजा जिन विद्यार्थियो की किताब से अदावत थी वे भी अब उन्हें प्रेमिका की भाति नजदीक रखकर पढ़ रहे थे । कुछ तो उनके साथ बैठकर अध्ययन कर रहे थे जो पढ़ाई मे तेज हो। जो प्रत्येक लेक्चर मे बैठा हो। कॉलेज के जो शरारती छात्र थे, उनका मकसद साफ था। उनको सिर्फ उत्तीर्ण होना था। अच्छे अंको से उनका दुर दुर तक कोई नाता नही था। वे केवल उत्तीर्ण हो जाए इसी मे वे खुश थे। ऐसे छात्र जल्दी से अपना पेपर ल...