मेट्रो... उन दिनों ( प्यार क्या है ? ) - 5
"Yessssss.... काव्या जी।"- 'काव्या जी' बोलते वक्त मैंने उसकी आँखों में देखा।
"जी!"- उसने आश्चर्य से मेरी ओर देखा।
"तुमको याद था मेरे कन्वोकेशन के बारे में ?"- मैंने कहा।
"हाँ, मैं जल्दी भूलती नहीं हूँ। कन्वोकेशन में सभी दोस्त आए होंगे ?"
"हाँ, लगभग सभी।"
"तुमने फोटोज़ क्लिक की ?"
"ज्यादा नहीं, लगभग ना के बराबर फोटोज़ क्लिक की।"
"क्यों ? तुमको तो फोटोज़ का शौक भी है।"- काव्या ने कहा।
"मेरे बाकी क्लासमेट्स ने फोटोज़ निकाली लेकिन मैंने नहीं।"
"पर क्यों ?"
"Actually I was miss my one friend."- ये कहने के बाद मैं दूसरी ओर देखने लगा।
"सिर्फ एक दोस्त नहीं आया तो तुमने एंजॉयमेंट भी नहीं किया।"
"ख़ास दोस्त है इसीलिए। और बाकी सब तो उस दिन अपने अपने ग्रुप के लोगों के साथ फोटोज़ क्लिक करने में लगे थे।"
"तो तुमको भी उनके बीच चला जाना चाहिए था।"
"मैंने सोचा था, लेकिन कर नहीं पाया। बस खड़े खड़े देखता रहा।"- मैंने मेट्रो की खिड़की से बाहर नज़रे टिकाए हुए कहा।
"मतलब तुम्हारे लिए कन्वोकेशन कुछ खास नहीं घटा ?"
"Absolutely true."
"वैसे बात तो सही है। ख़ास दोस्त के बिना क्या मज़ा।"- काव्या ने गर्दन हिलाई।
"तुमको पता है काव्या। जिंदगी में जब हम कुछ हासिल करते है या कुछ बड़ा करते है उस वक्त हमारे साथ हमारा परिवार या कोई दोस्त नहीं रहता है तब उस उपाधि में हमें कुछ ख़ास नहीं लगता। बस ऐसा होता है कि दे रहे है तो ले लेते है। मज़ा तो तब आता है जब सफ़र का साथी भी हमारे साथ सफ़र की उपाधि लेने के लिए मौजूद हो। I don't know तुम इस बारे में क्या सोचती हो लेकिन मेरे तो यही विचार है।"- मैंने कहा।
"बात तो तुम्हारी सच है Prince. जिस दोस्त के साथ तुमने ग्रेजुएशन किया वोही कन्वोकेशन में नहीं आया तो तुम्हारा उदास होना लाज़मी है।"
"लेकिन हो गया ग्रेजुएशन। मैंने कुछ फ़ोटोज निकाली है, ये देखो।"
मैंने मोबाइल निकाला और जो कुछ तस्वीरें मैंने क्लिक की वो दिखाने लगा। काव्या ने मेरा फोन लेने की इजाज़त मांगी। "Offcourse." - यह कहते हुए मैंने अपना फोन उसको दे दिया। काव्या कन्वोकेशन की कुछ तस्वीरें देखने लगी जो मात्र गिनती की थी।
"मैं भी यही सोच रहा हूँ।"
"बस एक ही ?" - काव्या ने कहा।
"एक दो फ़ोटो और है। जिन लड़कों के साथ फोटो ली वो लोग भेजेंगे तो उनमें से कुछ कर दूंगा।"
"ग्रेजुएट हो गए हो। अब कंधों पर बहुत जिम्मेदारियां आ जाएगी।"
"Yaa Offcourse. सभी की तरह।"
"एक सवाल का जवाब दो प्रिंस। क्या जॉब अपना पैशन छुड़वा देती है ?"
"हाँ। Mostly जॉब लगने के बाद एक व्यक्ति अपने पैशन को फोलो नहीं कर पाता है।"
"तुमको लगा कभी ऐसा ?"
मैं काव्या की इस बात पर उसकी ओर देख के उस अंदाज में मुस्कुराया जो "हाँ" को दर्शाता है। हम दोनों कुछ सेकंड शांत रहे।
"तुमको लगा कभी ऐसा ?" - मैंने कहा।
"मेरा ऐसा कोई लाइफ में स्पेसिफिक गोल नहीं था। एडिटिंग और फोटोग्राफी में बस इंट्रेस्ट है। कोई पैशन वगैरा नहीं।"
"कभी दिखाना तुम्हारी फोटोग्राफी। फिर मैं तुम्हारी फोटोज को रेटिंग दूंगा।"
"ये तो हमारा सौभाग्य होगा कि आप हमारी फोटोज को रेटिंग दोगे।"
"कितना एक्टिंग करती हो तुम!"
"तुम भी किया करो। गंभीर रहने से तो अच्छा ही है।"- काव्या ने ऐसे कहा जैसे कोई बुजुर्ग औरत शिक्षा दे रही हो।
मुझे अचानक मेरा गाना याद आया जो एक दो दिन पहले ही यूट्यूब पे रिलीज हुआ था। मैंने अपना फोन निकाला और यूट्यूब पर गया। काव्या ने कहा - "क्या देख रहे हो ?"
"फाइनली इतनी मेहनत के बाद मेरा पहला गाना आया है। तुम सुनोगी ?"- मैंने उसकी ओर एयरबड्स बढ़ाए।
पहले तो काव्या ने धीरे से मेरे कंधे पर मारा और बाद में कहा - "तुम पागल हो गया क्या ? मुश्किल से बारह या तेरह मिनट हमे मिलते है बात करने के लिए। मिलते ही बता देते न। ताकि सुनने के बाद डिस्कशन कर लेते। बुद्धू हो तुम। लाओ दो एयरबड्स।"
उसने एयरबड्स लगा लिए और मेरा फोन अपने हाथों में लिया। काव्या गाना सुनने में व्यस्त हो गई थी। तीन मिनट तक हमारे बीच कोई बातचीत नहीं हुई। गाने के विजुअल्स देख के वो मुस्कुरा रही थी। मैं भी स्क्रीन पर ही देख रहा था। जब गाना पूरा हुआ तो उसने एयरबड्स निकाल दिए।
"Wow Prince. it's beautiful song. Really! तुमने लिखा ये गाना ?
"हाँ।"
"It's really beautiful song yaar."- काव्या ने आश्चर्यचकित वाले भाव में कहा।
"पिछले कुछ महीनों से लगा था मैं इस गाने पर। न जाने कितनी पंक्तियों को लिखा और फिर मिटाया।"
"ये तो तुम्हारी मेहनत है यार।"
"Yaa. और वैसे भी हर खूबसूरत चीज़ बनने में हमेशा वक्त लेती ही है।"- मैं काव्या की ओर देख के मुस्कुराया।
"म्यूजिक आइडिया किसका है ?"
"गाने के शुरुआत में जो म्यूजिक बजता है उसका आइडिया मेरा है। बाकी जिन लोगों ने काम किया है उनका आइडिया है।"
"प्यार पर इतना अच्छा गाना! कभी हुआ है तुमको किसी से प्यार ?" - काव्या ने पूछा।
"लड़कियाँ दोस्त रही है मेरी, लेकिन प्यार व्यार किसी से हुआ नहीं आज तक।"
"फिर भी प्यार पर तुम लिख लेते हो, गाना बना देते हो। कमाल है यार!"- काव्या ने कहा।
"प्यार पर लिखने के लिए, प्यार करना जरूरी होता है क्या ?"- मैंने कहा।
"ऐसा कुछ नहीं है। मर्डर पर स्टोरी लिखने वाला इंसान भी कहाँ मर्डर किया होता है। फिर भी लिख लेता है।"
"Exactly. तुमको हुआ है कभी प्यार ?" - मैंने पूछा।
"हाँ। लेकिन वो प्यार एकतरफा था।
"मतलब सिर्फ़ तुम उससे प्यार करती थी ? वो नहीं ?"
"हाँ।"
"तुमको कैसे पता चला कि वो तुमसे प्यार नहीं करता ?"- मैंने कहा।
"पता चल जाता है प्रिंस। वो किसी और लड़की को भी डेट कर रहा था। चीटर निकला वो।"
"उसके बाद क्या हुआ ?"
"वो अपने रास्ते और मैं अपने रास्ते।"- काव्या ने सख्त लहज़े में कहा।
"लेकिन पता है मेरे मन को शांति कब मिली ?" - काव्या ने कहा।
"कब ?"
"जब मैंने उसे आखिरी बार मिलने के लिए बुलाया और ज़ोर से उसके कान के नीचे एक मारा।"- यह कहते हुए काव्या हँसने लगी।
"वो इसी का हकदार था। और तुमको पता है काव्या मेरे अनुसार प्यार की कोई फ़िक्स परिभाषा नहीं है। किसी के लिए प्यार सबसे बहुमूल्य चीज़ हो सकती है। किसी के लिए जिससे वो प्यार करता है वो जान से बढ़कर हो सकता है। किसी के लिए पल भर की खुशी हो सकता है प्यार। किसी के लिए समय बिताने का जरिया हो सकता है प्यार। किसी के लिए सिर्फ जिस्म की भूख हो सकता है प्यार। कुछ भी हो सकता है।" - मैंने कहा।
"Right. I agree."- काव्या ने कहा।
"देखा, मैंने प्यार किया नहीं है फिर भी इतना कुछ बोल दिया।"- मैंने अपने बालों पर हाथ फेरा और इतराते हुए कहा।
"रहने दो ये इतराना तुमसे नहीं होगा।"- काव्या ने कहा।
"तुम्हारे अनुसार क्या है प्यार ?"- मैंने काव्या से पूछा।
"उम्म.... मेरे अनुसार प्यार है एक अनकंडीशनल बॉन्ड।"
"जहाँ दो प्यार करने वालों के बीच कोई कंडीशन ना हो।"- मैंने कहा।
"Right. क्योंकि जहाँ हम प्यार में कंडीशन रखने लगते है फिर वो प्यार कैसा।"
"प्यार में स्वतंत्रता होनी चाहिए। प्यार वही सच्चा है जो आजादी दे न कि बंदिश में रखें।"- मैंने कहा।
"Exactly yaar."- काव्या ने ग्रेब हैंडल में गले विज्ञापन को घुमाते हुए कहा।
"लेकिन ये एकतरफा प्यार करके मुझे एक सीख मिली।"- काव्या ने मेरी ओर देख के कहा।
"कौन सी सीख ?"
"ये एकतरफा प्यार करके मैंने सीखा कि जरूर नहीं जिससे तुम प्यार कर रहे हो वो भी तुमसे प्यार करे। तुम जबरदस्ती किसी की पसंद तो नहीं बन सकते न।"
"हमारे साथ घटित हुई हर घटना हमे कुछ न कुछ सिखाके जाती है।"- मैंने कहा।
'मारोल नाका' से 'डी. एन नगर' आने तक के बारह मिनट खत्म होने में डेढ़ मिनट ही शेष रह गए थे। हम दोनों दरवाज़े के क़रीब खड़े थे। काव्या अपने फोन में नोटिफिकेशन चेक कर रही थी। मैंने कहा -
"तीन - चार दिनों के लिए राजस्थान जा रहा हूँ।"
"क्यों ?" - काव्या ने पूछा।
"शादी है किसी की।"- मैंने कहा।
"कही तुम तो शादी नहीं कर रहे हो। राजस्थानी हो भरोसा नहीं।"- उसने हँसते हुए कहा।
"स्टीरियोटाइप है ये तो। अब बहुत कम हो गया है। हाँ कही कही पर अभी भी है।"
"I know. वैसे तुम राजस्थान जा रहे हो ये बात मुझे क्यों बता रहे हो ?" - काव्या ने नज़रे तिरछी की और शक करने वाले लहज़े में बोला।
"बस ऐसे ही। मुझे लगा कि बताना चाहिए इसीलिए बता दिया। क्यों, नहीं बताया चाहिए था क्या ?"- मैंने कहा।
काव्या मेरी ओर देखी और शायद 'डी. एन नगर' आने का इंतज़ार करने लगी। उसने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया। हम दोनों दरवाज़े की खिड़की से बाहर देख रहे थे। अब 'डी. एन नगर' आने में कुछ ही सेकंड शेष रहे गए थे।
"वापस कब तक आओगे ?"- काव्या ये कहकर मन ही मन में हँसने लगी।
"वैसे तुम मुझसे ये क्यों पूछ रही हो ?"- अबकी बार मैंने कहा।
"बस ऐसे ही। मुझे लगा कि पूछना चाहिए इसीलिए पूछ लिया। क्यों, नहीं पूछना चाहिए था क्या ?"- अबकी बार उसने कहा।
हम दोनों मुस्कुराने लगे। "बस एक सप्ताह।"- मैंने कहा। 'डी. एन नगर' आ गया। बाहर निकलने पर गर्म हवा का अहसास हुआ। 'Change here for the yellow line' - मेट्रो में अनाउसमेंट हो रही थी। मेट्रो 'डी. एन नगर' से निकल गई। काव्या दरवाज़े के क़रीब खड़ी थी और 'वर्सोवा' स्टेशन आने का इंतज़ार कर रही थी।
© रविंद्र मुंडेतिया
( 'मेट्रो... उन दिनों' की कहानी अभी जारी है...
चैप्टर 6 पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें - क्यों है ये दिन काव्या के लिए स्पेशल ?
.png)



Comments
Post a Comment