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Showing posts from September, 2025

भारत में आध्यात्मिक गुरुओं का बढ़ता प्रभाव

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  मनुष्य का पतन तब शुरू होता है जब वह तर्क और विवेक की जगह अंधविश्वास को अपना लेता है। भारत प्राचीन काल से ही एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भूमि रहा है। यहाँ ऋषि-मुनियों, साधुओं और धर्मगुरुओं ने न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को आकार दिया है। इन संतों ने जीवन की कठिनाइयों से जूझते लोगों को आशा, मार्गदर्शन और आत्मबल प्रदान किया। आज भी करोड़ों लोग अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शकों को ईश्वर का रूप मानते हैं। यह भी सच है कि इन गुरुओं ने योग, ध्यान और आंतरिक शांति जैसे मार्गों को लोकप्रिय बनाकर विश्व पटल पर भारत की पहचान को और ऊँचा किया है। लेकिन समय के साथ इन संतों और प्रवचनकर्ताओं की छवि में बड़ा बदलाव आया है। अब ये केवल धार्मिक शिक्षक नहीं रह गए, बल्कि राजनीतिक प्रभावशाली, आर्थिक रूप से सशक्त और समाज पर गहरा मानसिक नियंत्रण रखने वाले व्यक्तित्व बन चुके हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का हालिया बयान, जिसमें उन्होंने कहा कि 75 वर्ष की आयु के बाद नेताओं को सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले लेना चाहिए। मोहन भागवत के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी। उनकी इस टिप्पणी को लोग...

लालबागचा राजा - आस्था के सागर में VIP की लहर

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  गणेशोत्सव , यह त्योहार भारतीय संस्कृति में मात्र एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि एक लोक-सांस्कृतिक आयोजन है जिसमें श्रद्धा, सामुदायिक जुड़ाव और आनंद का संयोग नज़र आता है। गणेशोत्सव मात्र महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं है बल्कि देश की हर गालियों में ये उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र की गलियों से निकलकर यह त्योहार पूरे देश में एक साझा भावनात्मक धारा बन जाता है। यूँ तो देश के कई हिस्सों में इस दौरान गणेश जी की पूजा की जाती है लेकिन जो मज़ा गणेशोत्सव का महाराष्ट्र में आता है वो कही नहीं आता है और वैसे भी हर राज्य के अपने अपने त्यौहार और धार्मिक उत्सव होते है जो उस राज्य की पहचान भी बन जाती है। जैसे पश्चिम बंगाल का दुर्गा पूजा, उत्तर प्रदेश के वाराणसी की देव दीपावली, गुजरात की नवरात्रि, पंजाब की बैसाखी और राजस्थान का पुष्कर ऊंट मेला।  लालबागचा राजा, मुंबई का सबसे प्रसिद्ध गणेश पंडाल, लगभग सौ वर्षों से भक्तों का आस्था का केंद्र रहा है। यहां लाखों श्रद्धालु हर वर्ष ‘चरण दर्शन’ की लालसा लेकर आते हैं। यह पंडाल केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शहर की पहचान और जन-संस्कृति की अभिव्...