Posts

Showing posts from February, 2023

गली क्रिकेट ( रुल्स व रेगुलेशन )

Image
गली क्रिकेट            आईपीएल भारत का एक त्योहार बन चुका है। आईपीएल आते ही इसका नशा सभी के सिर चड़ पर जाता है।जवान व्यक्ति ही नहीं बल्कि बच्चे भी इस नशे में धुत हो जाते है। पिछले कुछ सालों से क्रिकेट ने खूब नाम कमाया है। हर मोहल्ले का लड़का अब सचिन तेंदुलकर बनना चाहता है और इसकी शुरुआत हमेशा गली के क्रिकेट से होती है।      सच कहें तो गली का यह क्रिकेट किसी वर्ल्ड कप या आईपीएल से कम नहीं है। जितने नियम आईपीएल और वर्ल्ड कप में नहीं होते है उससे कही ज्यादा नियम गली क्रिकेट में मिल जाते है। इन नियमो का सख्ती से पालन भी होता है। अगर कोई नियम के साथ ना चले तो उसे दूसरे दिन खेलने को नहीं मिलता है, मगर हां जिसका बैट रहेगा उसके साथ यह सख्ती नहीं की जाएगी क्योंकि बैट एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्रिकेट का।      कल इतवार था। मोहल्ले के बच्चे स्कूल में आज की हाजिरी लगाकर आ गए थे। सांझ का वक्त था। शाम की ठंडी हवा गलियों से गुजर रही थी। रोनक अपने घर से निकला। कुछ देर के बाद सभी मैदान में आ गए यानी गली में आ गए। बच्चों के लिए यह गली ह...

पहली दफा ( हिन्दी कविता )

Image
     बनारस की गलियाँ ऐसी है कि किसी को जल्दी समझ मे ही नही आती। मगर हाँ बनारस की यह गलियाँ पसंद बहुत आती है। कब गली खत्म हुई और कब नई गली जुड़कर शुरु हो गई इसका कुछ पता नही चलता है। ये गलियाँ बनारस की खुबसूरती है। पहली दफा ये कविता बनारस की गलियों पर नहीं है बल्कि बनारस की गलियों में जिसे देखा उस पर है। एक चेहरा जो मुझे बाद में कहीं दिखा ही नहीं। पहली दफा पहली दफा  बनारस की गलियों से होकर उसके  घर की ओर एक रस्ता जाता है । उस ढूंढ़ने में मेरा दिल इन्हीं  कहीं गलियों में खो जाता है । अस्सी घाट सा सुहाना है  उसका और मेरा टकराना है। जब देखा उसे पहली बार  हुआ नहीं दिल पर विश्वास , सोचा कोई कैसे हो सकता है इतना खूबसूरत यार । होठो पे मुस्कान,आंखों में हल्का काजल लगाए रखती है । उल्फत की जुल्फो में न जाने कितने राज़ वो छुपाए रखती है । खुदा के दरबार में इत्र के  सूगंध सी लगती है । हाथो में मेहंदी, कानों में बाली, लड़की वो मीठी गाली सी लगती है । हसता खेलता ये दिल अब पागल हो गया है उसे पाने को, डर, फिक्र रहती है हर दफा कहीं यकायक खो न दे ...

बेनाम रिश्ता

Image
बेनाम रिश्ता .....      हम कॉलेज में कहीं दफा मिल चुके थे। कभी कैंटीन में, कभी कैंपस में, कभी कॉरिडोर में, कभी क्लास रूम में। यह बात मुझे आज तक समझ नहीं आई कि उसका सब्जेक्ट अलग था और मेरा सब्जेक्ट अलग था, फिर भी हम दोनों कॉलेज में कहीं ना कहीं मिल ही जाते थे। अलबत्ता इसमें भगवान की मर्जी हो। हम दोनों अभी तक इस रिश्ते को कोई नाम नहीं दे पाए थे और शायद देना भी नहीं चाह रहे थे। ना उसने कभी दोस्ती का हाथ बढ़ाया ना मैंने कभी बढ़ाया और बात भी सही है अगर कोई रिश्ता बेनाम ही अच्छा चल रहा है तो क्यों उस रिश्ते को नाम देकर हम बिगाड़ दे। मुझे यह रिश्ता बेनाम ही अच्छा लग रहा था और मैं इसे जीता रहा।      मुझे कॉलेज के कामों से कभी कभी ही फुर्सत मिलती थी। मैं हर वक्त व्यस्त रहता था। आज लेक्चर दोपहर का था। काफ़ी दिन हो गए थे तारा से मिले हुए। तकरीबन एक महीने से ऊपर। इम्तिहान का जोर था लिहाज़ा तारा भी अपनी स्टडी में मसरूफ थी और में भी। मैंने लेक्चर खत्म होने के बाद, वॉट्सएप पर तारा को मेसेज किया।      "Hi taara, aaj marine lines chale kya?" ...

दिव्य कला मेला 2023

Image
दिव्य कला मेला 2023, यह मेला दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा बनाई उनकी चीजे, उत्पाद और शिल्फ कारीगरी को प्रदर्शित कराने के लिए आयोजित किया गया है। यह मेला मुंबई में आयोजित किया है और यह 16-25 फरवरी, 2023 तक बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के एमएमआरडीए ग्राउंड नं. 1 में आयोजित हो रहा है। अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार और राज्य मंत्री रामदास आठवले ने इस मेले का 16 फरवरी को उद्घाटन किया। यह मेला 10 दिनों तक चलेगा।       मेले में क्या क्या खास है?      इस मेले में लगभग 200 से ज्यादा विकलांग लोग अपनी कलाकारी और उत्पादों, कौशल का प्रदर्शन करेंगे। देश के तमाम राज्यो से जैसे जम्मू और कश्मीर, दिल्ली, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और राजस्थान जैसे ओर भी राज्यो के विकलांग लोग यहां अपनी कलाकृति दिखा रहे है। यह मेला सभी के लिए आयोजित है। प्रवेश निशुल्क है। लोगों को तरह तरह की वेशभूषा देखने को मिलेगी, खाने पीने में विविधता मिलेगी, खाने पीने की ढेरों स्टोल लगी है। इसके अलावा कल्चरल प्रोग्राम भी यहां हर शाम होगा। जिसमे कुछ...